
इस वक्त वैश्विक कूटनीति के लिए जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही भारत के लिए भी एक रणनीतिक मोड़ बन गई है. आमतौर पर द्विपक्षीय विवादों से दूरी बनाकर चलने वाला भारत इस बार न केवल वार्ता का समर्थन कर रहा है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से उसकी दिशा में भी अपनी भूमिका निभा रहा है. यह स्थिति भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, ऊर्जा नीति और ग्लोबल बैलेंस में उसकी बढ़ती भूमिका को सामने लाती है.
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बार ट्रंप-पुतिन वार्ता का खुला समर्थन करते हुए इसे यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत के रूस के साथ संबंध स्वतंत्र हैं और उन्हें किसी तीसरे पक्ष की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए. यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत आमतौर पर ऐसे विवादों में सार्वजनिक रूप से पक्ष नहीं लेता, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं
